अपने मोबाइल सेट पर *#07# डायल कर रेडिएशन की खुद भी जांच करते रहिए।
सफर में हों या बाजार में, घर में हों या सरे राह, जैसे ही आप अपने चारो तरफ एक नजर डालेंगे, कानो में झुलनी (एयर फोन) लटकाए, हथेली पर मोबाइल टिकाए तमाम ऐसे युवा और बड़े-बूढ़े दिख जाएंगे, लगेगा, मानो सारे जहां का दर्द बस उनके ही जिगर में है। इस बदहवाशी का कोई क्या करे। मोबाइल पर चौबीसो घंटे नाचते रहने के अलावा उनके पास जैसे और कोई काम नहीं रह गया। उन्हें क्या पता कि डब्ल्यूएचओ के बुलावे पर दुनिया भर के वैज्ञानिक रेडिएशन से नुकसान पर गंभीर मंत्रणा कर रहे हैं। भारत में जब अंग्रेजों का राज था, उन्होंने हिंदुस्तानियों को उस वक्त चाय की चुस्कियां लेने की आदत पकड़ा दी। फिर तो ऐसी लत लगी कि बड़े-बड़े चाय बागान, बड़ी-बड़ी टी-कंपनियों के अरबों के सालाना टर्नओवर का आज तांता लग चुका है।
मोबाइल फोन के बिना अब हम जिंदगी की कल्पना भी नहीं कर पाते। आदत ऐसी बन गई है कि जब कॉल नहीं होता, तो भी हमें लगता है कि घंटी बज रही है। यह घंटी दरअसल खतरे की घंटी हो सकती है। मोबाइल फोन और मोबाइल टावर से निकलने वाला रेडिएशन सेहत के लिए खतरा भी साबित हो सकता है। लेकिन कुछ सावधानियां बरती जाएं, तो मोबाइल रेडिएशन से होने वाले खतरों से काफी हद तक बचा जा

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